कोलकाता हाई कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने उन प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी सूची और उनकी मौजूदा पोस्टिंग का ब्योरा सामने रखा, जो उस वक्त चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा थे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान व्यापक पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा- ‘भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से करीब 44,000 से 55,000 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध तरीके से हटा दिए गए थे। इसी का नतीजा था कि ममता बनर्जी को वहां 15,000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी और अनियमित गतिविधियां अंजाम दी गईं।’
ममता बनर्जी की हार के पीछे बड़ी साजिश- कल्याण बनर्जी
कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर तीन बड़े अधिकारियों के नाम लेते हुए उनके वर्तमान पदों और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। सबसे पहला नाम मनोज अग्रवाल का लिया जो, पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। इन्हें चुनाव के ठीक बाद चीफ सेक्रेटरी बना दिया गया। यह साफ तौर पर पक्षपात और उपकार के बदले उपकार का मामला है। जिनके कार्यकाल में हजारों वोटर्स के नाम कटे और कई शिकायतें दर्ज हुईं, उन्हें मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद मुख्य सचिव (Chief Secretary) बना दिया गया। एक समय तो वे दोनों पदों पर एक साथ काम कर रहे थे। वहीं, भवानीपुर में 44,000 वोट कटने के समय वे स्पेशल ऑब्जर्वर थे, और आज वे मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
टीएमसी की दलीलों और मतगणना हॉल में हुई कथित हाथापाई व हिंसा के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश ने मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मतगणना हॉल और उसके आसपास के सभी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज, VVPAT और EVM को पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए। संबंधित अधिकारी और विपक्षी पक्ष को 4 सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा।
कल्याण बनर्जी ने साफ कहा, “हमने अदालत को बताया है कि काउंटिंग हॉल में हमारे लोगों के साथ जो मारपीट और दुर्व्यवहार हुआ था, उसे सीसीटीवी फुटेज के जरिए आसानी से साबित किया जा सकता है। कोर्ट ने हमारी इस मांग को स्वीकार कर लिया है।”
आगे क्या होगा? बंगाल की राजनीति पर असर
हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 दिनों के बाद की तारीख तय की है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि 4 सप्ताह के भीतर आने वाले हलफनामे और सीसीटीवी फुटेज की जांच में कोई भी गड़बड़ी या प्रक्रियात्मक चूक सामने आती है, तो भवानीपुर का पूरा चुनाव परिणाम सवालों के घेरे में आ जाएगा।
सत्ता पक्ष जहां इसे टीएमसी की खीझ बता रहा है, वहीं टीएमसी का साफ कहना है कि यह लड़ाई लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को बचाने की है। बहरहाल, कलकत्ता हाई कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब गेंद चुनाव आयोग और उन अधिकारियों के पाले में है जिन्हें तय समय सीमा के भीतर कोर्ट में अपनी बेगुनाही का सबूत देना होगा।
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